God Wakes -Up When The Bell Rings
मीडिया का अंधविश्वासी प्रचार प्रसार ;
यह काहे का और कहाँ का विज्ञान है ???
" वैज्ञानिक आधार पर बात करें तो जब हम मंदिर में घंटी बजाते हैं तब इससे पैदा हुआ कंपन वातावरण में मौजूद विषाणुओं और जीवाणुओं के अलावा सूक्ष्म जीवों को खत्म कर देता है। जिससे वातावरण साफ होता है। इसके अलावा घंटी बजाने से नकारात्मक शक्तियां भी खत्म होती हैं।
जब आप मंदिर में जाकर घंटी बजाते हैं तब मंदिर में देवी देवताओं की मूर्ति जाग्रत हो जाती है। और वे आपको प्रभावशाली रूप में आपकी मदद करते हैं। घंटी बजाने से कई तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। घंटी नाद का प्रतीक है। ओम के बाद घंटी को नाद का प्रतीक माना जाता है। घंटी बजाने से हाथों की यौगिक क्रिया भी होती है जिससे हाथों मे दर्द की समस्या दूर होती है। किसी भी पूजा को तभी पूरा माना जाता है जब आरती होती है".[दैनिक हिंदुस्तान]. Courtesy Hirday Nath
यह काहे का और कहाँ का विज्ञान है ???
" वैज्ञानिक आधार पर बात करें तो जब हम मंदिर में घंटी बजाते हैं तब इससे पैदा हुआ कंपन वातावरण में मौजूद विषाणुओं और जीवाणुओं के अलावा सूक्ष्म जीवों को खत्म कर देता है। जिससे वातावरण साफ होता है। इसके अलावा घंटी बजाने से नकारात्मक शक्तियां भी खत्म होती हैं।
जब आप मंदिर में जाकर घंटी बजाते हैं तब मंदिर में देवी देवताओं की मूर्ति जाग्रत हो जाती है। और वे आपको प्रभावशाली रूप में आपकी मदद करते हैं। घंटी बजाने से कई तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। घंटी नाद का प्रतीक है। ओम के बाद घंटी को नाद का प्रतीक माना जाता है। घंटी बजाने से हाथों की यौगिक क्रिया भी होती है जिससे हाथों मे दर्द की समस्या दूर होती है। किसी भी पूजा को तभी पूरा माना जाता है जब आरती होती है".[दैनिक हिंदुस्तान]. Courtesy Hirday Nath
Vishva Mitter Bammi कुछ प्रश्न हैं इन घंटी राम जी से उत्तर माँगने के लिए हैं:-
1.जब से मंदिरों में घंटी बजनी शुरू हुई कया उस समय किसी को पता था कि सूक्ष्म जीव
( बैक्टीरिया ) भी होते हैं?
2.नकारात्मक शक्तियाँ कया होती हैं?अनियंत्रित प्रमाणु विखण्डन या संयोजन से तबाही होती है, कया घंटी बजाने से यह तबाही दूर हो सकती है?
3. मंदिर की घंटी बजाने से यदि हाथों की योगिक क्रिया होती है तो सड़क पर रोड़ी कूटने वालों की कयों नहीं होती, वे भी तो हथौड़ी घंटी की तरहं ही चलाते हैं।परन्तु रात को उन के हाथ दुखते हैं। ऐसा कयों?
4. घंटी बजाने से देव मूर्तियाँ यदि जागृत होती हैं तो कया वे सोती जागती हैं। यदि ऐसा है तो जरूर उन का दिल धड़कता होगा। कया किसी डाक्टर ने सटैथोस्कोप लगा कर इस की पुष्टी की है?
अंत में साथ दी गई तस्वीर पर लिखा पढ़ें
1.जब से मंदिरों में घंटी बजनी शुरू हुई कया उस समय किसी को पता था कि सूक्ष्म जीव
( बैक्टीरिया ) भी होते हैं?
2.नकारात्मक शक्तियाँ कया होती हैं?अनियंत्रित प्रमाणु विखण्डन या संयोजन से तबाही होती है, कया घंटी बजाने से यह तबाही दूर हो सकती है?
3. मंदिर की घंटी बजाने से यदि हाथों की योगिक क्रिया होती है तो सड़क पर रोड़ी कूटने वालों की कयों नहीं होती, वे भी तो हथौड़ी घंटी की तरहं ही चलाते हैं।परन्तु रात को उन के हाथ दुखते हैं। ऐसा कयों?
4. घंटी बजाने से देव मूर्तियाँ यदि जागृत होती हैं तो कया वे सोती जागती हैं। यदि ऐसा है तो जरूर उन का दिल धड़कता होगा। कया किसी डाक्टर ने सटैथोस्कोप लगा कर इस की पुष्टी की है?
अंत में साथ दी गई तस्वीर पर लिखा पढ़ें
Natthu Ram Pradhan पुराने मंदिरों में खिड़कियां, रोशनदान नहीं होते थे चोरी के डर से | कम प्रकाश में भगवान देवी देवता के भोग के कुछ छूटे गिरे भाग खाने के लिए चूहे आते थे| चूहों को खाने के लिए साँप आ जाते थे| उन्हें भगाने के लिए पुजारी सबसे पहले घंट शंख बजाते थे | इस ध्वनी से लोगों को पूजा प्रारंभ होने की खबर भी हो जाती थी|

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